जय जय आरती वेद विधारे, वेद विधारे जय जय जय ।
कार्तिकेय भगवान की आरती, महिमा गाएँ सब जय जय जय ॥
षड्मुख षट्कर धारण दर्शन, मयूर वाहन राजित तज गण ।
शक्ति कुमार सुशोभित परिजन, वेदों के ज्ञाता जय जय जय ॥
ताराकासुर वध कर्ता स्वामी, देवों के सेनापति नामी ।
शिवसुत गिरिजा उर आरामी, तिहु लोकों के अधिकारी ॥
देव महादेव पिता जाके, कीरति गावें वेद त्रिलोकी ।
शरणागत भक्तों की माँगें, तत्क्षण पूरी करते स्वामी ॥