॥ दोहा ॥
श्री रघुवीर भक्त हितकारी । सुन लीजै प्रभु अरज हमारी ॥
निशिदिन ध्यान धरैं जो कोई । ता सम भक्त और नहिं होई ॥
॥ चौपाई ॥
श्री रघुवीर भक्त हितकारी । सुन लीजै प्रभु अरज हमारी ॥
जय जय जय श्री राम रघुराई । पूजन लायक आरति गाई ॥
रामचन्द्र मुख चन्द्र निहारे । कोटि काम छवि पर बलि जावें ॥
भुवन भूमि भय हरन निशाचर । भक्त हृदय में बसन निरन्तर ॥
राम नाम को भजन जो करता । भव जल से वह पार उतरता ॥
काम क्रोध मद लोभ सताये । राम कृपा से सब मिट जाए ॥
बल बुद्धि बिद्या देहु प्रभु मोहीं । काम क्रोध भय छीनो सोहीं ॥
राम काज सब सुगम बनावें । जहाँ तहाँ संगत ले जावें ॥
बल्लम पाय राम हित आये । पल में बिग्रह मेटन पाये ॥
जेहि पर कृपा करत प्रभु राम । दुःख दरिद्र बाधा रहे न तास ॥
राम राम कहत जो जन प्यारे । भव जल से भगवान उबारे ॥
राम भरोसे जे नर रहहीं । तिन्ह के काज देव सब सहहीं ॥
जै जै जै लक्ष्मण बन्धु सुख सागर । सीता राम चरन अनुरागर ॥
रामचन्द्र आनन्द वृष्टि । भक्त जनों को करहु तुष्टि ॥
राम ब्रह्म ब्रह्माण्ड निवासी । अखिल जगत व्यापक अविनाशी ॥
तीरथ राज प्रयाग निवासी । राम नाम मोहे अति प्यारो ॥
प्रणवहु राम कृपानिधाना । सकल लोक जाको जसगाना ॥
राम नाम सबसे बड़ तारक । भवसागर से पार उतारक ॥
जो कोई इसका पाठ करेगा । दीनानाथ उसे निहारेगा ॥
॥ दोहा ॥
सुन्दर सीता राम जी के चरण मन बसाइ ।
रामचन्द्र के भजन से दुर्गति मिटि जाइ ॥