अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गावें भारती,
ओ मैय्या हम सब उतारें आरती ॥
तेरे भक्त जनों पर माता,
भीर पड़ी है भारी ।
दानव दल पर टूट पड़ो माँ,
करके सिंह सवारी ॥
सौ सौ सिंहों से तू बलशाली,
अष्ट भुजाओं वाली ।
दुष्टों को तू दण्ड देने को,
प्रकटी आज ज्वाला ॥
मैं भी तुझसे ही आयी हूँ माँ,
धर्म धरे मेरी लाज ।
सब मिल के जयकार करेंगे,
तेरी ही मैय्या आज ॥