त्रिपुष्कर ('तीन गुना') योग तब बनता है जब द्वितीया, सप्तमी या द्वादशी तिथि रविवार, मंगलवार या शनिवार को कृत्तिका, पुनर्वसु या उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के साथ पड़ती है। प्रभाव तीन गुना होता है और शुभ कार्य तीन गुना लाभ देते हैं।
द्विपुष्कर का अधिक शक्तिशाली संस्करण। पारम्परिक रूप से धन-संचय मुहूर्तों के लिए आदर्श और किसी भी नकारात्मक कार्य से बचने योग्य।