रवि पुष्य योग तब बनता है जब पुष्य नक्षत्र रविवार को पड़ता है। रविवार सूर्य द्वारा शासित है और पुष्य बृहस्पति द्वारा पोषित। दोनों मिलकर एक अत्यंत दुर्लभ और शक्तिशाली योग बनाते हैं।
वर्ष में केवल 4-6 बार आता है। व्यावसायिक शुभ प्रारंभों के लिए गुरुपुष्यामृत के समकक्ष माना जाता है।