गुरुपुष्यामृत (जिसे गुरु पुष्य अमृत भी कहा जाता है) तब आता है जब पुष्य नक्षत्र गुरुवार को पड़ता है। पुष्य 'पोषक' नक्षत्र है और गुरुवार बृहस्पति का दिन। यह संयोग धन-संबंधित कार्यों के लिए सबसे शुभ मुहूर्त माना जाता है।
वर्ष में केवल 4-6 बार आता है। जौहरी, शेयर बाजार के व्यापारी और व्यवसायी पूरे भारत में गुरुपुष्यामृत की विशेष प्रतीक्षा करते हैं।