गुरु पुष्य योग वही गुरुवार-पुष्य संयोग है जो गुरुपुष्यामृत में होता है। कुछ परंपराएं इसे शिक्षा, अध्यात्म और ज्ञान पर केंद्रित एक विशिष्ट योग मानती हैं।
अध्ययन, शिक्षण और मंत्र साधना प्रारंभ करने के लिए अत्यंत अनुकूल। भक्ति व्रत प्रारंभ करने के लिए भी प्रयुक्त।